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Poos ki Raat (पूस की रात) by Munshi Premchand

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प्रेमचंद के उपनाम से लिखने वाले धनपत राय श्रीवास्तव हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उन्हें मुंशी प्रेमचंद व नवाब राय के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें उपन्यास सम्राट के नाम से भी नवाजा गया गया था। इस नाम से उन्हें सर्वप्रथम बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने संबोधित किया था।


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"हलकू ने आकर सतरी से कहा—सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ। किसी तरह गला तो छूटे। मुननी झाडू लगा रही थी। पीछे फिर कर बोली—तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कंबल कहाँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे। अभी नहीं। हलकू एक कषण अनिशचित दशा मे खडा रहा। पूस सिर पर आ गया, कंबल के बिना हार में रात को वह किसी तरह नहीं सो सकता।

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